Chhath Nahay Khay

Date - 24 October 2017

Tuesday

Chhath Kharna

Date - 25 October 2017

Wednesday

Chhath Sandhya Argh

Date - 26 October 2017

Chhath Evening Argh Time - 5:41 PM
Thursday, October 26, 2017 (IST)

Sunset in Mukund Vihar, Mukundpur, Delhi, India

Chhath Morning Argh

Date - 27 October 2017

Chhath Morning Argh Time - 6:30 AM
Friday, October 27, 2017 (IST)
Sunrise in Mukund Vihar, Mukundpur, Delhi, India

Raksha Bandhan

 
 
रक्षा बंधन का मुहूर्त !समयांतराल !दोपहर में रक्षा बंधन का समय !
प्रदोष में रक्षा बंधन का समय आदि का विवरण इस तरह है | 
 
रक्षा बंधन मुहुर्त -११;०४ से ९;१२ 
समयांतराल -१० घंटे ८ मिनट 
दोपहर में रक्षा बंधन का समय -१;४६ से ४;२४ 
समयांतराल  - २ घंटे ३८ मिनट 
प्रदोष में रक्षा बंधन का समय - ७;१३ से ९;१२ 
समयांतराल - २ घंटे ९ मिनट 
 
रक्षा बंधन  एक हिन्दू  त्यौहार है |  जो श्रवण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है | रक्षाबंधन  खुशियों का त्यौहार होता है | इस दिन सभी बहने अपने भाइयो की कलाई पर राखी बांधती है |   
और भगवान से प्राथना करती है की मेरे भाई की हमेशा रक्षा करना | रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहनो को बहुत से उपहार देते है और उनसे वादा करते है की वो हमेशा उनकी रक्षा करेंगे | रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसे सिर्फ हिन्दु नही बल्कि अन्न धर्मो के लोग भी मनाते है | जैसे सिख ,जैन आदि | राखी सिर्फ बहने भाइयो के ही नहीं बांधती अपितु आज कल तो कई लोग किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बांधते है क्योकि राखी को लोग रक्षा सूत्र मानते है जो उस व्यक्ति की रक्षा करती है जिसकी कलाई पर बंधी होती है 
 
रक्षा बंधन की कहानी - रानी कर्णावती और हुमायुँ की 
 
यह कहानी उस समय की है जब राजपूतो और मुस्लिमो के बीच संघर्ष चल रहा था | राजा की गैरमौजूदगी में राज्य का कार्य भार रानी कर्णावती ही संभाला करती थी इसलिए इस मुसीबत से कैसे निपटा जायें उन्हें समझ नहीं आ रहा था | इसलिए उन्होंने बहादुर शाह से अपनी राज्य की रक्षा करने के लिए हुमायुँ को राखी भेजकर मदद मांगी | और हुमायुँ ने उनकी विनती स्वीकार कर उन्हें बहन का दर्जा दिया तथा उनके राज्य की रक्षा की | 
 
भगवान विष्णु और राजा बलि 
राजा बलि ने ११० यज्ञ पूरे कर लिए थे इसलिए देवताओं को डर था की कही राजा बलि वरदान में स्वर्ग न माग ले | इसी समस्या के हल के लिए सरे देवता मिलकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्राथना की वह ही है जो स्वर्ग की रक्षा कर सकते है | इसलिए भगवान विष्णु वामन रूप धारण कर  राजा बलि के पास जाते है | और राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते है और राजा बलि उनसे कहते है की आप नाप लो और भगवान विष्णु एक पग उठाते है और स्वर्ग नाप लेते है तथा दूसरे पग में पूरी  प्रथ्वी  नाप लेते है | जब तीसरा पग उठाने  की  बारी आती  है तो राजा बलि परेशान हो जाते है क्योकि अब कुछ बचता ही नहीं नापने के लिए इसलिए राजा बलि तुरंत अपना सर रख देते उनके चरणों में और कहते है अपना तीसरा पग यहाँ रखिये इसी तरह राजा बलि से स्वर्ग और पृथ्वी में रहने का अधिकार छीन जाता है | और वह रसताल लोक में रहने के लिए मजबूर हो गए | कहते है राजा बलि ने अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को दिन रात अपने साथ रहने को मजबूर कर दिया | जिससे माता लक्ष्मी जो की भगवान विष्णु की अर्धांगिनी है वह बहुत परेशान हो गई तो नारद जी ने उपाय बताया की वो राजा बलि को राखी बांधे और उनसे उपहार में भगवान विष्णु को मांग ले |और लक्ष्मी जी ने ऐसा ही किया जिसके उपरांत भगवान विष्णु वापस बैकुंठ लौट आये |  उस दिन से रक्षा बंधन प्रत्येक वर्ष सावन की पूर्णिमा को मनाया जाने लगा 
 
 रक्षा बंधन गाने 
 
भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को ना भुलाना
देखो ये नाता निभाना
भैया मेरे राखी...

ये दिन ये त्यौहार खुशी का, पावन जैसे नीर नदी का
भाई के उजले माथे पे, बहन लगाए मंगल टीका
झूमे ये सावन सुहाना 
भैया मेरे राखी के बंधन...

बाँध के हमने रेशम डोरी, तुमसे वो उम्मीद है जोड़ी
नाज़ुक है जो सांस के जैसे, पर जीवन भर जाए न तोड़ी
जाने ये सारा ज़माना
भैया मेरे राखी के बंधन...

शायद वो सावन भी आए, जो पहला सा रंग न लाए
बहन पराए देश बसी हो, अगर वो तुम तक पहुँच न पाए
याद का दीपक जलाना
भैया मेरे राखी के बंधन...
 
 
रक्षा बंधन संदेश

नींद अपनी भुलाकर सुलाए हमको ,
आँशु अपने गिराकर हसाये सबको ,
दर्द कभी न देना उस देवी के अवतार को ,
जमाना जिसे कहता है बहन जिसको ,
रक्षा बंधन की शुभकामनाये प्यारी बहनो ,

चावल की खुशबू और केसर का श्रृंगार ,
राखी, तिलक ,मिठाई और खुशियों की बौछार ,
बहनो का साथ और बेशुमार प्यार ,
मुबारक हो आपको राखी का त्यौहार ,

न पापा की मार से न दोस्तों की फटकार से ,
न लड़की के इनकार से ,
न चप्पलो के बौछार से ,
आप जैसे आशिक सुधरेंगे ,
सिर्फ राखी के त्यौहार से ,

आज का दिन बहुत खास है ,
बहन के लिए कुछ मेरे पास है ,
तेरे शुकून के खातिर ओ बहना ,
तेरा भाई तेरे आस -पास है ,
रक्षा बंधन मुबारक , 
 
सावन की सौगंध बारिश की फौआर ,
भाई की उम्मीद बहन का प्यार ,
मुबारक हो आपको ,
रक्षा बंधन का त्यौहार ,
 
पल -पल से बनता है अहसास ,
अहसास से बनता है विशवास  ,
विशवास से बनते है रिश्ते ,
और रिश्ते  से बनता है कोई खास ,
रक्षा बंधन की शुभकामनाये ,
 
भाई के लिए राखी का संदेश 
 
 याद है हमारा वो बचपन ,
 वो लड़ना -झगड़ना ,
और वो मना लेना ,
यही होता है भाई बहन का प्यार ,
और इस प्यार को बढ़ाने के लिए ,
आ रहा है रक्षा बंधन का त्यौहार ,
 
 
बहन के लिए राखी का संदेश 
 
 
बचपन की वो भीनी स्मृतियाँ ,
लेकर आया राखी का त्यौहार ,
बात -बात पर वो रूठना मेरा ,
स्नेह तुम्हारा ज्यों बाबुल का प्यार ,
मुबारक हो भैया तुम्हें रक्षा बंधन का त्यौहार ,
 
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है ,
प्यार के दो तार से संसार बाँधा है ,
रेशम की डोरी से संसार बाँधा है ,
हमे दूर भले किस्मत कर दे ,
अपने मन से ना जुदा करना,
सावन के पावन दिन  भईया ,
बहना को याद किया करना ,
 
राखी आई खुशियाँ लाई ,बहन आज फूली न समाई ;
राखी ,रोली और मिठाई ,इन सब से थाली खूब सजाई ;
बाँधे भाई की कलाई पे धागा ,भाई से ले लेती है यह वादा ;
राखी की लाज भईया निभाना ,
बहन अपनी को कभी न भूल जाना ,
भाई देता बहन को वचन ,दुःख उसके सब कर लेगा हरण ;
भाई बहन को प्यारा है ,राखी का यह त्यौहार न्यारा है ;
 
रक्षा बंधन पर मजेदार संदेश 
 
लड़का और लड़की बस स्टॉप पर खड़े थे ,
लड़का -ये रिश्ता  क्या कहलाता है ?
लड़की -पवित्र रिश्ता ,
लड़का -इस प्यार को क्या नाम दू ?
लड़की -एक हजारो में मेरी बहना है ,
 
राखी का त्यौहार था ,
राखी बंधाने को भाई तैयार था ,
भाई बोला  बहना मेरी अब तो राखी बांध दो ,
बहना बोली ,कलाई पीछे करो ,पहले रूपए हजार दो ,
 
हर लड़की को आपका इंतजार है ,
हर लड़की आप के लिए बेकरार है ,
हर लड़की को आपकी आरज़ू है ,
ये आपका कोई कमाल नहीं ,
कुछ दिन बाद राखी का त्यौहार है ,
 
 
रक्षा बंधन कविता 
 
प्रीत के धागो के बंधन में ,
स्नेह का उमड़ रहा संसार ,
सारे जग में सबसे सच्चा ,
होता भाई बहन का प्यार ,
नन्हे भाई का है कहना,
राखी बांधो प्यारी बहना ,
 
रंग बिरंगी राखी बाँधी ,
फिर सुंदर सा तिलक लगाया ,
गोल गोल रसगुल्ला  खाकर ,
भैया मन ही मन मुस्काया ,
 
बारी बारी ऋतुएँ आती ,
अपनी छटा यहां  दिखलाती ,
फल- फूलों से भरे बगीचे ,
चिड़िया मीठी गीत सुनाती ,
देश मेरा सबसे न्यारा ,
कितना सुन्दर कितना प्यारा। 
 
 
 

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