Chhath Nahay Khay

Date - 24 October 2017

Tuesday

Chhath Kharna

Date - 25 October 2017

Wednesday

Chhath Sandhya Argh

Date - 26 October 2017

Chhath Evening Argh Time - 5:41 PM
Thursday, October 26, 2017 (IST)

Sunset in Mukund Vihar, Mukundpur, Delhi, India

Chhath Morning Argh

Date - 27 October 2017

Chhath Morning Argh Time - 6:30 AM
Friday, October 27, 2017 (IST)
Sunrise in Mukund Vihar, Mukundpur, Delhi, India

Hartalika teej

Hartalika Teej 

Day - Thursday
Date 24 August 2017

यह हरतालिका व्रत सबसे पहले पार्वती जी ने शकंर जी को पति के रूप में पाने के लिए लिया था ! इस व्रत का नाम हरत + आलिका दो शब्दों से मिलकर बना है ! हरत का मतलब हरण करना और आलिका सखियों को दर्शता है !
इस व्रत में पार्वती जी स्वयंमेव इच्छा से अपने सखियों द्वारा हर ली गई थी ! और उस समय ही उन्होंने यह हरतालिका व्रत किया था ! 

Hartalika teej story in hindi

सती रूप के बाद माँ पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्मी ! जन्म के बाद थोड़ी बड़ी होने पर ही उन्होंने भगवन शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप प्रारम्भ कर दिया !
उनके ऐसे कठिन तप को देख हिमवान विचार में पड़ गए कि इस कन्या के लिए वे वर किसको चुने ?
एक दिन जब किसी कारण वश नारद जी जब उनके महल में पधारे तो उन्होंने अपनी चिंता उनसे बतलाई ! तो नारद ने उन्हें उनकी पुत्री के लिए श्री हरी विष्णु का नाम सुझा दिया !

अब यह प्रस्ताव् सुन हिमवान बहुत खुश हुए पर जब पार्वती जी को पता चला तो वः बहुत दुखी हो गई ! और उन्होंने अपनी सखी से शरीर त्यागने की बात कही !
उनकी सखियों ने उन्हें समझाया और कहा कि वे उन्हें हर कर किसी एकांत जगह में पंहुचा देंगी जहाँ वह भगवन शंकर की कठिन उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सके !
और पार्वती जी ने उस वन में निर्जल व्रत कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया !

Hartalika vrat vidhi

हरतालिका व्रत विधि

हरतालिका व्रत का प्रहर शाम और रात के मध्य प्रदोष काल को माना जाता है ! इस समय ही इस व्रत का उचित समय आरम्भ होता है ! मिटटी से शिव परिवार की मूरत बनाते है ! शिव पार्वती के साथ गणेश जी की पूजा होती है !
फूलों का छत्र बना कर उसके नीचे रंगोली सजाई जाती है ! उस रंगोली पर चौकी बिछा कर उस पर सातिया डाल कर थाल सजाया जाता है ! फिर थाल पर केले के पत्ते को रख मूर्ति स्थापित की जाती है !
फिर एक कलश के मुंह पर कलावा बांध कर उस पर कलावा बंधा श्रीफल रख दिया जलाते है !
घड़े पर सातिया बना कर अक्षत चढ़ाते है !
कलश का पूजन कर फूल माला, हल्दी, कुमकुम, और सिक्का दक्षिणे में चढ़ाते है !
सर्वप्रथम शिव जी की पूजा फिर माता पार्वती की पूजा कर श्रृंगार सामग्री चढ़ाते है !
खीर नैवैद्य में डालते है !
आरती कर पूजा संपन्न करते है !
यह व्रत सभी स्त्रियां निर्जला रह कर करती है ! दूसरे दिन सभी सामग्री को निर्माल्य में डाल देते है !

Hartalika teej Vrat Samagri

Mitti 
Sindur
Ganga jal
Kumkum
Bhagwan ke kapde
Suhag ka saman
Aasan
Lal Kapda
Roli
Moli
Mithaiyan
kapoor
Chandan
vrati ke naye kapde
Fruits
Flowers
Dhoop
Milk
Dahi
Ghee
Shakkar
Shahad
Sukhe meve



 

 

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