Chhath Nahay Khay

Date - 12 November 2018

Sunday

Chhath Kharna

Date - 12 October 2018

Monday

Chhath Sandhya Argh

Date - 13 November 2018

Chhath Evening Argh Time - 5:28 PM
Tuesday, November 13, 2018 (IST)

Sunset in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

Chhath Morning Argh

Date - 14 November 2018

Chhath Morning Argh Time - 6:43 AM
Wednesday,November 14, 2018 (IST)
Sunrise in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

Shree Krishna Janmashtami श्री कृष्ण जन्माष्टमी

 

Shree Krishna Janmashtami 2017 श्री कृष्ण जन्माष्टमी 

 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी  Shree Krishna Janmashtami 2017  : 14 August, Monday (Date may vary)

 


About Krishna Janmashtami :

Indiais land of festivals. Lot of festivals celebrated here be people of India. Shree Krishna Janmashtami is one o them.KrishnaJanmashtami, also known as many namaes as Krishnashtami, Saatam Aatham, Gokulashtami, Ashtami Rohini, Srikrishna Jayanti, Sree Jayanti or Janmashtami,In this festival the f the birth of the Hindu deity Shree Krishna celebrated as the eighth avatar of Vishnu.

 
२०१७ कृष्ण जन्माष्टमी

श्री कृष्ण के भक्त जो जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, जन्माष्टमी के एक दिन पहले केवल एक ही समय भोजन करते हैं। जन्माष्टमी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के पश्चात,श्री कृष्ण के भक्त पूरे दिन उपवास रखकर, अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद व्रत कर पारण का संकल्प लेते हैं। कुछ कृष्ण-भक्त मात्र रोहिणी नक्षत्र अथवा मात्र अष्टमी तिथि के पश्चात व्रत का पारण कर लेते हैं। संकल्प प्रातःकाल के समय लिया जाता है और संकल्प के साथ ही अहोरात्र का व्रत प्रारम्भ हो जाता है।
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव इस बार 25 अगस्त दिन गुरुवार को पड़ रहा है. इस बार की कृष्ण जन्माष्टमी इसलिए खास है क्योंकि यह अष्टमी और उनके जन्म नक्षत्र रोहिणी के पावन संयोग में मनेगा. पूरे 52 साल बाद ऐसा पावन संयोग बन रहा है. ग्रहों के विशेष संयोग के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनेगा. ऐसा योग 52 साल पहले 1958 में बना था.
भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था. भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाने की परंपरा भी है.
 
श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा
 
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को  काली  अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी ने  श्रीकृष्ण को जन्म दिया था। कृष्ण जन्माष्टमी  राजा कंस के युग से संबंधित है।बहुत समय पहले , कंस मथुरा का राजा था। कंस  देवकी के एक चचेरा  भाई  था  वह अपनी बहन को गहरे दिल से प्रेम करता था  और कभी भी उसे उदास नहीं होने देता था।
.वह अपनी बहन की शादी में पूरे मन से शामिल हुआ और आनंद लिया। एक बार जब वह अपनी बहन के  घर जा रहा था। तभी उसे आकाश में से आकाशवाणी सुनाई दी जिसने उसे चेतावनी दी  “कंस, जिस बहन को तुम बहुत प्यार करते  हो वह एक दिन तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगी। देवकी  का आठवां पुत्र तुझे मार डालेगा।

जैसे ही, उसे चेतावनी मिली, उसने अपने सैनिकों को दिया की देवकी और  उसके पति वासुदेव को  बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया जाए।  उसने  मथुरा के सभी लोगों के साथ बड़ी ही निर्दयता और  क्रूरता से बर्ताव करना शुरू कर दिया। उसने घोषणा कर दी की मैं अपनी बहन के सभी पत्रु को मार दूँगा जो मेरी मृत्यु का कारण है। कंस ने देवकी के पहले पुत्र को मार दिया फिर उसके बाद धीरे -धीरे करके उसके सातों पुत्र कंस  द्वारा मारे गए।  
बाद में देवकी अपने आठवें बच्चे के साथ गर्भवती हुई अर्थात कृष्ण जी जो कि (भगवान विष्णु के  अवतार) थे । भगवान कृष्ण ने द्वापरयुग  में मध्य रात्रि में श्रावण के महीने में अष्टमी (आठवें दिन) को जन्म लिया । उस दिन से, लोगों ने उसी दिन कृष्णा जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी का त्यौहार मनाना शुरू कर दिया।

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